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अधूरे काग़ज़ात, अटकी जांच… NEET छात्रा केस में सच तक पहुंचने की राह क्यों कठिन हो रही है?

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पटना:न्याय की बुनियाद सबूतों पर टिकी होती है, लेकिन जब वही सबूत पूरे न हों तो जांच की दिशा भटकने लगती है। पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल से जुड़े बहुचर्चित NEET छात्रा दुष्कर्म मामले में यही स्थिति सामने आ रही है। मामला अब ऐसे मोड़ पर है, जहां तकनीकी जांच से ज्यादा बड़ा सवाल यह बन गया है कि जरूरी दस्तावेज आखिर समय पर पूरे क्यों नहीं दिए जा रहे।
इस केस की परतें खोलने के लिए गठित SIT ने पटना एम्स को कुछ अहम मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े रिकॉर्ड सौंपे हैं, लेकिन ये दस्तावेज अधूरे बताए जा रहे हैं। नतीजा यह है कि एम्स की विशेषज्ञ टीम एक सप्ताह से सक्रिय होने के बावजूद किसी ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पा रही।
एम्स तैयार, लेकिन सबूत अधूरे
एम्स पटना में निदेशक और अधीक्षक के निर्देश पर पांच सदस्यीय विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है। इस टीम में फॉरेंसिक, स्त्री रोग, न्यूरोलॉजी और रेडियोलॉजी जैसे अहम विभागों के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं। टीम का नेतृत्व फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार कर रहे हैं।
डॉ. विनय कुमार के अनुसार, मेडिकल रिव्यू किसी अनुमान पर नहीं बल्कि दस्तावेजों, टाइमलाइन और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होता है। जब रिकॉर्ड पूरे और एक साथ नहीं मिलते, तो जांच की कड़ियां जोड़ना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि फिलहाल रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।
किस्तों में दस्तावेज, सवालों के घेरे में SIT
सूत्रों के मुताबिक SIT दस्तावेज एक साथ देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से सौंप रही है। इससे जांच प्रक्रिया खिंचती जा रही है और समय के साथ साक्ष्यों की प्रासंगिकता पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि देरी से न सिर्फ वैज्ञानिक सटीकता प्रभावित होती है, बल्कि न्याय की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।
जनता पूछ रही—न्याय कब?
यह मामला अब सिर्फ एक आपराधिक केस नहीं रहा, बल्कि व्यवस्था की संवेदनशीलता और जवाबदेही की कसौटी बन चुका है। छात्रा के साथ हुई घटना के बाद से ही पूरे बिहार में आक्रोश है और लोग यह जानना चाहते हैं कि सच सामने आने में और कितना वक्त लगेगा।
एम्स की टीम निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन गेंद अब SIT के पाले में है। सभी जरूरी दस्तावेज कब तक सौंपे जाएंगे, यही तय करेगा कि यह जांच आगे बढ़ेगी या अधूरी फाइलों के बीच उलझी रहेगी। फिलहाल, न्याय की राह सबूतों के इंतजार में थमी हुई नजर आ रही है।

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